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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.77.24 
श्रुत्वैव पार्थमायान्तं भीमसेन: प्रतापवान्।
त्यक्त्वा प्राणान् महाराज सेनां तव ममर्द ह॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! पार्थ के आगमन की बात सुनकर वीर भीमसेन प्राणों का मोह त्यागकर आपकी सेना का दमन करने लगे।
 
Maharaj! On hearing of Partha's arrival, the valiant Bhimasena gave up his attachment to life and began to crush your army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)