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mahabharat 8.77.22: शत्रुओं की ओर बढ़ते हुए उनके रथ की तेज आवाज उस ध्वनि के समान प्रतीत हो रही थी, जो पहले किसी सर्प को पकड़ने के लिए झपटे हुए गरुड़ के पंखों से उत्पन्न हुई थी। 22   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.77.22 
तस्य शब्दो महानासीत् परानभिमुखस्य वै।
गरुडस्येव पतत: पन्नगार्थे यथा पुरा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं की ओर बढ़ते हुए उनके रथ की तेज आवाज उस ध्वनि के समान प्रतीत हो रही थी, जो पहले किसी सर्प को पकड़ने के लिए झपटे हुए गरुड़ के पंखों से उत्पन्न हुई थी। 22
 
The loud sound of His chariot as it advanced towards the enemies appeared similar to the sound that had earlier been produced by the wings of an Eagle when it pounced to catch a serpent. 22
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)