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mahabharat 8.77.21: हे राजन! उस सेना को अपने बाणों से बुरी तरह घायल करके और उन्हें भगाकर कुन्तीपुत्र अर्जुन कर्ण की सेना के सामने गये।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.77.21 
तां तु सेनां भृशं विद्‍ध्वा द्रावयित्वार्जुन: शरै:।
प्रायादभिमुख: पार्थ: सूतानीकं हि मारिष॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस सेना को अपने बाणों से बुरी तरह घायल करके और उन्हें भगाकर कुन्तीपुत्र अर्जुन कर्ण की सेना के सामने गये।
 
Respected King! After wounding that army severely with his arrows and sending them away, Kunti's son Arjun went in front of Karna's army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)