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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.77.20 
तेषां शब्दो महानासीद् द्रवतां वाहिनीमुखे।
महौघस्येव जलधेर्गिरिमासाद्य दीर्यत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि की ओर दौड़ते हुए योद्धाओं द्वारा किया गया महान शोर वैसा ही प्रतीत हो रहा था, जैसा समुद्र से पानी की एक बड़ी धारा के पहाड़ से टकराने पर होता है।
 
The great noise made by the warriors running towards the battlefront seemed similar to that produced when a great current of water from the ocean strikes a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)