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mahabharat 8.77.17: कौरव योद्धा युद्ध भूमि में अर्जुन के धनुष से छूटे हुए बाणों से मारे जा रहे थे और भय के मारे इधर-उधर छिपने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.77.17 
ते वध्यमाना: समरे पार्थचापच्युतै: शरै:।
तत्र तत्र स्म लीयन्ते भये जाते महारथा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कौरव योद्धा युद्ध भूमि में अर्जुन के धनुष से छूटे हुए बाणों से मारे जा रहे थे और भय के मारे इधर-उधर छिपने लगे।
 
The Kaurava warriors were getting killed in the battle-field by the arrows shot from Arjun's bow and started hiding here and there out of fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)