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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना
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श्लोक 12
श्लोक
8.77.12
तेषामापततां पार्थमाराव: सुमहानभूत्।
सागरस्येव क्षुब्धस्य यथा स्यात् सलिलस्वन:॥ १२॥
अनुवाद
पार्थ पर आक्रमण करते समय उन सैनिकों द्वारा किया गया कोलाहलपूर्ण शोर समुद्र के अशांत जल की गम्भीर ध्वनि के समान सर्वत्र गूँज रहा था।
The uproarious noise made by those soldiers as they attacked Partha resounded everywhere like the deep sound of the turbulent waters of the ocean.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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