श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका अपने सारथि विशोकसे संवाद  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.76.31 
विभ्राजते चातिमात्रं किरीटं
विचित्रमेतच्च धनंजयस्य।
दिवाकराभो मणिरेष दिव्यो
विभ्राजते चैव किरीटसंस्थ:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
धनंजय का यह अद्वितीय मुकुट अत्यंत उज्ज्वल है। इस मुकुट में जड़ा दिव्य मणि सूर्य के समान चमकता है ॥31॥
 
This unique crown of Dhananjaya is extremely bright. The divine gem embedded in this crown shines like the Sun. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)