श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 75: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध तथा सुषेणका वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.75.2 
संजय उवाच
तेषामनीकानि बृहद्‍ध्वजानि
रणे समृद्धानि समागतानि।
गर्जन्ति भेरीनिनदोन्मुखानि
नादैर्यथा मेघगणास्तपान्ते॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज ! जैसे ग्रीष्म ऋतु के समाप्त होने पर बादल गरजने लगते हैं, उसी प्रकार दोनों पक्षों की सेनाएँ एकत्रित होकर युद्धभूमि में गर्जना करने लगीं। उनके बीच बड़ी-बड़ी ध्वजाएँ लहरा रही थीं और सभी सैनिक अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थे। युद्ध की तुरहियों की ध्वनि उन्हें युद्ध के लिए उत्सुक कर रही थी॥2॥
 
Sanjaya says - Maharaj! Just as the clouds start roaring after the summer season is over, similarly the armies of both the sides gathered and started roaring on the battlefield. Big flags were fluttering among them and all the soldiers were equipped with weapons. The sound of war trumpets was making them eager for the war.॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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