श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 75: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध तथा सुषेणका वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.75.16 
कृपं तु दृष्ट्वा विरथं रथस्थो
नैच्छच्छरैस्ताडयितुं शिखण्डी।
तं द्रौणिरावार्य रथं कृपस्य
समुज्जह्रे पङ्कगतां यथा गाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य को रथहीन देखकर रथ पर बैठे हुए शिखण्डी ने उन पर बाणों से प्रहार करना नहीं चाहा। तब अश्वत्थामा ने शिखण्डी को रोककर कृपाचार्य के रथ को, जो कीचड़ में फँसी हुई गाय के समान था, बचा लिया॥16॥
 
Seeing Kripacharya without a chariot, Shikhandi, who was sitting on the chariot, did not wish to attack him with arrows. Then Ashvatthama stopped Shikhandi and rescued Kripacharya's chariot, which was like a cow stuck in the mud.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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