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mahabharat 8.75.13: वीर उत्तमौजा ने हठपूर्वक कर्णपुत्र सुषेण पर आक्रमण किया और उसका सिर काट डाला। सुषेण का सिर भूमि पर गिर पड़ा, और उसकी करुण पुकार आकाश और पृथ्वी में गूंज उठी।   |   mahabharat अध्याय 8.75: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध तथा सुषेणका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 75: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध तथा सुषेणका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.75.13 
कर्णात्मजं तत्र जघान वीर-
स्तथाच्छिनच्चोत्तमौजा: प्रसह्य।
तस्योत्तमाङ्गं निपपात भूमौ
निनादयद् गां निनदेन खं च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वीर उत्तमौजा ने हठपूर्वक कर्णपुत्र सुषेण पर आक्रमण किया और उसका सिर काट डाला। सुषेण का सिर भूमि पर गिर पड़ा, और उसकी करुण पुकार आकाश और पृथ्वी में गूंज उठी।
 
The valiant Uttamauja stubbornly attacked Sushen, the son of Karna, and cut off his head. Sushen's head fell to the ground, echoing in the sky and the earth with its wailing cry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)