श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 75: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध तथा सुषेणका वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.75.1 
धृतराष्ट्र उवाच
समागमे पाण्डवसृञ्जयानां
महाभये मामकानामगाधे।
धनंजये तात रणाय याते
कर्णेन तद् युद्धमथोऽत्र कीदृक्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- हे संजय! मेरे पुत्र पाण्डवों और संजयों में पहले से ही घोर भयंकर युद्ध चल रहा था। फिर जब धनंजय भी कर्ण से युद्ध करने के लिए वहाँ पहुँचे, तब उस युद्ध का स्वरूप क्या था?॥1॥
 
Dhritarashtra asked- dear Sanjaya! A deep and dreadful war was already going on between my sons, Pandavas and Sanjayas. Then when Dhananjaya also reached there to fight with Karna, what was the nature of that war?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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