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mahabharat 8.74.6: हे श्रीकृष्ण! हे वार्ष्णेय! मैंने भी सब ओर से प्रज्वलित होते हुए भार्गवस्त्र को देखा है, जिसे कर्ण ने उसी प्रकार प्रकट किया है, जैसे इन्द्र वज्र का प्रयोग करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.74.6 
भार्गवास्त्रं च पश्यामि ज्वलन्तं कृष्ण सर्वश:।
सृष्टं कर्णेन वार्ष्णेय शक्रेणेव यथाशनिम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे श्रीकृष्ण! हे वार्ष्णेय! मैंने भी सब ओर से प्रज्वलित होते हुए भार्गवस्त्र को देखा है, जिसे कर्ण ने उसी प्रकार प्रकट किया है, जैसे इन्द्र वज्र का प्रयोग करते हैं।
 
Sri Krishna! O Varshneya! I have also seen the Bhargavastra (weapon) blazing from all sides, which has been manifested by Karna in the same manner as Indra uses the thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)