Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.74.57: मेरे एक हाथ में बाण के चिह्न हैं और दूसरे में दिव्य धनुष की रेखा है, जिस पर बाण चढ़ा हुआ है। उसी प्रकार मेरे पैरों में भी रथ और ध्वजा के चिह्न हैं। जब मेरे समान गुणों वाला कोई योद्धा युद्ध में प्रकट होता है, तब शत्रु उसे पराजित नहीं कर सकते।॥57॥ | mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्गार । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाणौ पृषत्का लिखिता ममैते
धनुश्च दिव्यं विततं सबाणम्।
पादौ च मे सरथौ सध्वजौ च
न मादृशं युद्धगतं जयन्ति॥ ५७॥
अनुवाद
मेरे एक हाथ में बाण के चिह्न हैं और दूसरे में दिव्य धनुष की रेखा है, जिस पर बाण चढ़ा हुआ है। उसी प्रकार मेरे पैरों में भी रथ और ध्वजा के चिह्न हैं। जब मेरे समान गुणों वाला कोई योद्धा युद्ध में प्रकट होता है, तब शत्रु उसे पराजित नहीं कर सकते।॥57॥
‘In one of my hands there are marks of an arrow and in the other there is the line of a divine bow with an extended arrow. Similarly, on my feet also there are marks of a chariot and a flag. When a warrior with characteristics like mine appears in the battle, then the enemy cannot defeat him.’॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥