श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  8.74.56 
शरार्चिषा गाण्डिवेनाहमेक:
सर्वान् कुरून् बाह्लिकांश्चाभिहत्य।
हिमात्यये कक्षगतो यथाग्नि-
स्तथा दहेयं सगणान् प्रसह्य॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
मैं अकेला ही बाणों की ज्वाला से भरे हुए गाण्डीव धनुष की सहायता से समस्त कौरवों और बाह्लीकों को उनकी सेना सहित मार डालूँगा और उन्हें ग्रीष्म ऋतु में सूखी लकड़ी को जला देने वाली अग्नि के समान भस्म कर दूँगा।
 
I alone, with the help of the Gandiva bow filled with the flames of arrows, will kill all the Kauravas and Bahlikas along with their army and will reduce them to ashes like the fire burning dry wood in the summer season.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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