श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  8.74.55 
अहं धनुष्मान् ससुरासुरांश्च
सर्वाणि भूतानि च सङ्गतानि।
स्वबाहुवीर्याद् गमये पराभवं
मत्पौरुषं विद्धि परं परेभ्य:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
‘मैं अपने धनुष और भुजबल से देवताओं, दानवों तथा समस्त प्राणियों को एक साथ परास्त कर सकता हूँ। मेरे पुरुषार्थ को तुम श्रेष्ठतम समझो ॥55॥
 
‘With my bow and arm strength, I can defeat the gods, demons and all living creatures together. Consider my efforts to be the best of the best. ॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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