| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्गार » श्लोक 51-52h |
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| | | | श्लोक 8.74.51-52h  | धृष्टद्युम्नशिखण्डिभ्यां पञ्चालानां च माधव॥ ५१॥
अद्यानृण्यं गमिष्यामि हत्वा कर्णं महाहवे। | | | | | | अनुवाद | | माधव! आज महासमर में कर्ण को मारकर मैं धृष्टद्युम्न, शिखण्डी तथा पांचालों के ऋण से मुक्त हो जाऊँगा। | | | | Madhav! Today, by killing Karna in the great battle, I will be freed from the debt of Dhrishtadyumna, Shikhandi and Panchalas. | | ✨ ai-generated | | |
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