| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्गार » श्लोक 46-47h |
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| | | | श्लोक 8.74.46-47h  | अद्याहमनृण: कृष्ण भविष्यामि धनुर्भृताम्॥ ४६॥
कोपस्य च कुरूणां च शराणां गाण्डिवस्य च। | | | | | | अनुवाद | | हे कृष्ण! आज मैं समस्त धनुर्धरों, क्रोध, कौरवों, बाणों और यहाँ तक कि गाण्डीव धनुष के ऋण से भी मुक्त हो जाऊँगा। | | | | Lord Krishna! Today I will be freed from the debt of all archers, anger, Kauravas, arrows and even the Gandiva bow. | | ✨ ai-generated | | |
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