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mahabharat 8.74.45-46h: केशव! या तो आज मैं इस पृथ्वी को धृतराष्ट्र के पुत्रों से मुक्त करके अपने भाई को सौंप दूँगा, या फिर आप अर्जुन के बिना पृथ्वी पर विचरण करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  8.74.45-46h 
अद्य निर्धार्तराष्ट्रां च भ्रात्रे दास्यामि मेदिनीम्॥ ४५॥
निरर्जुनां वा पृथिवीं केशवानुचरिष्यसि।
 
 
अनुवाद
केशव! या तो आज मैं इस पृथ्वी को धृतराष्ट्र के पुत्रों से मुक्त करके अपने भाई को सौंप दूँगा, या फिर आप अर्जुन के बिना पृथ्वी पर विचरण करेंगे।
 
Keshav! Either today I will clear this earth of the sons of Dhritarashtra and hand it over to my brother, or you will roam on the earth without Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)