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mahabharat 8.74.25: राधा पुत्र कर्ण को अपने उन कठोर शब्दों के लिए बहुत पश्चाताप होगा जो उसने राज दरबार में पाण्डवों की निन्दा करते हुए द्रौपदी से कहे थे। 25.   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.74.25 
अद्य तप्स्यति राधेय: पाञ्चालीं यत्तदाब्रवीत्।
सभामध्ये वच: क्रूरं कुत्सयन् पाण्डवान् प्रति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राधा पुत्र कर्ण को अपने उन कठोर शब्दों के लिए बहुत पश्चाताप होगा जो उसने राज दरबार में पाण्डवों की निन्दा करते हुए द्रौपदी से कहे थे। 25.
 
Radha's son Karna will deeply repent for the cruel words he had spoken to Draupadi while criticising the Pandavas in the court of the king. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)