श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.74.21 
योऽसौ रणे नरं नान्यं पृथिव्यामनुमन्यते।
तस्याद्य सूतपुत्रस्य भूमि: पास्यति शोणितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आज यह पृथ्वी उस सारथीपुत्र का रक्त पीएगी जो रणभूमि में किसी अन्य पुरुष को अपने समान नहीं समझता॥ 21॥
 
Today this earth will drink the blood of that son of a charioteer who does not consider any other man on the battlefield as his equal.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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