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mahabharat 8.74.19-20: मधुसूदन! जिस दुष्टात्मा ने मुझे मारने के लिए यह प्रतिज्ञा की है कि जब तक मैं अर्जुन को न मार डालूँ, तब तक मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा। उस पापी की यह प्रतिज्ञा मैं मिथ्या कर दूँगा तथा मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों द्वारा उसके शरीर को रथ से नीचे गिरा दूँगा।   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  8.74.19-20 
यस्य चैतद् व्रतं मह्यं वधे किल दुरात्मन:।
पादौ न धावये तावद् यावद्धन्यां न फाल्गुनम्॥ १९॥
मृषा कृत्वा व्रतं तस्य पापस्य मधुसूदन।
पातयिष्ये रथात् कायं शरै: संनतपर्वभि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! जिस दुष्टात्मा ने मुझे मारने के लिए यह प्रतिज्ञा की है कि जब तक मैं अर्जुन को न मार डालूँ, तब तक मैं दूसरों को अपने पैर नहीं धोने दूँगा। उस पापी की यह प्रतिज्ञा मैं मिथ्या कर दूँगा तथा मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों द्वारा उसके शरीर को रथ से नीचे गिरा दूँगा।
 
Madhusudana! The evil soul who has taken this vow to kill me that till I kill Arjun, I will not let others wash my feet. I will make this vow of that sinner false and will throw his body down from the chariot with the help of arrows having bent knots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)