श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.74.18 
अद्य चाहमनाधृष्यं केशवाप्रतिमं शरम्।
उत्स्रक्ष्यामीह य: कर्णं जीविताद् भ्रंशयिष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आज मैं एक ऐसा अतुलनीय और अजेय बाण छोड़ूँगा जो कर्ण के प्राण हर लेगा॥18॥
 
Today I will release a matchless and invincible arrow that will deprive Karna of his life.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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