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mahabharat 8.74.17: आज जब मैं सूतपुत्र कर्ण को मार डालूँगा, तब कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर प्रसन्न होंगे और दीर्घकाल तक संतुष्ट एवं प्रसन्न रहेंगे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.74.17 
अद्य कुन्तीसुतो राजा हते सूतसुते मया।
सुप्रहृष्टमना: प्रीतश्चिरं सुखमवाप्स्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आज जब मैं सूतपुत्र कर्ण को मार डालूँगा, तब कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर प्रसन्न होंगे और दीर्घकाल तक संतुष्ट एवं प्रसन्न रहेंगे॥17॥
 
Today, King Yudhishthir, son of Kunti, will be happy after I kill Karna, son of Suta, and will be satisfied and happy for a long time. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)