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mahabharat 8.74.16: गोविन्द! आज मैं अपने तीखे बाणों से कर्ण को मारकर कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर को चिन्ता के कारण जागरण से उत्पन्न हुए स्थायी रोग से मुक्त कर दूँगा॥16॥   |   mahabharat अध्याय 8.74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.74.16 
अद्य कुन्तीसुतस्याहं दृढं राज्ञ: प्रजागरम्।
व्यपनेष्यामि गोविन्द हत्वा कर्णं शितै: शरै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! आज मैं अपने तीखे बाणों से कर्ण को मारकर कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर को चिन्ता के कारण जागरण से उत्पन्न हुए स्थायी रोग से मुक्त कर दूँगा॥16॥
 
Govind! Today, by killing Karna with my sharp arrows, I will cure Kunti's son King Yudhishthira of his permanent disease caused by Jagran due to worry. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)