| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्गार » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 8.74.15  | अद्यासौ सौबल:कृष्ण ग्लहाञ्जानातु वै शरान्।
दुरोदरं च गाण्डीवं मण्डलं च रथं प्रति॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | हे भगवान् कृष्ण! आज सुबलपुत्र जुआरी शकुनि को यह ज्ञात हो कि मेरे बाण ही चाल हैं, मेरा धनुष ही पासे हैं और मेरा रथ ही बिसात है॥ 15॥ | | | | Lord Krishna! Today, let the gambler Shakuni, son of Subala, know that my arrows are the moves, my bow is the dice and my chariot is the board (square).॥ 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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