श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 74: अर्जुनके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.74.11 
गुणवन्तं हि यो द्वेष्टि निर्गुणं कुरुते प्रभुम्।
स शोचति नृप: कृष्ण क्षिप्रमेवागते क्षये॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान् कृष्ण! जो पुण्यात्माओं से द्वेष रखता है और पुण्यहीन को राजा बनाता है, वह राजा विनाशकाल आने पर दुःखी होकर पश्चाताप करता है॥11॥
 
Lord Krishna! He who hates the virtuous and makes a person without virtue his king, that king becomes filled with sorrow and repents when the time of destruction arrives. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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