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श्लोक 8.74.1  |
संजय उवाच
स केशवस्य बीभत्सु: श्रुत्वा भारत भाषितम्।
विशोक: सम्प्रहृष्टश्च क्षणेन समपद्यत॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं- भरतनन्दन! भगवान श्रीकृष्ण की यह वाणी सुनकर अर्जुन क्षण भर में शोकरहित होकर हर्ष और उत्साह से भर गया॥1॥ |
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| Sanjay says- Bharatnandan! Hearing this speech of Lord Krishna, Arjun became grief-free and filled with joy and enthusiasm in a moment. 1॥ |
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