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mahabharat 8.73.92-93h: आज दुष्ट कर्ण को गाण्डीव धनुष से छूटे हुए भयंकर बाणों से शरीर पर लगी चोटों को सहते हुए द्रोणाचार्य और भीष्म के वचनों का स्मरण करना चाहिए॥ 92 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 92-93h
 
 
श्लोक  8.73.92-93h 
गाण्डीवप्रहितान् घोरानद्य गात्रै: स्पृशन् शरान्॥ ९२॥
कर्ण: स्मरतु दुष्टात्मा वचनं द्रोणभीष्मयो:।
 
 
अनुवाद
आज दुष्ट कर्ण को गाण्डीव धनुष से छूटे हुए भयंकर बाणों से शरीर पर लगी चोटों को सहते हुए द्रोणाचार्य और भीष्म के वचनों का स्मरण करना चाहिए॥ 92 1/2॥
 
Today, the evil-spirited Karna, while suffering the wounds on his body from the dreadful arrows shot from the Gandiva bow, should remember the words of Dronacharya and Bhishma.॥ 92 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)