श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 83-85
 
 
श्लोक  8.73.83-85 
विनष्टा: पाण्डवा: कृष्णे शाश्वतं नरकं गता:॥ ८३॥
पतिमन्यं पृथुश्रोणि वृणीष्व मृदुभाषिणि।
एषा त्वं धृतराष्ट्रस्य दासीभूता निवेशनम्॥ ८४॥
प्रविशारालपक्ष्माक्षि न सन्ति पतयस्तव।
न पाण्डवा: प्रभवन्ति तव कृष्णे कथञ्चन॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण! पांडव नष्ट हो गए हैं और सदा के लिए नरक में हैं। पृथुश्रोणि! अब तुम्हें दूसरा पति चुन लेना चाहिए। मृदुभाषी! आज से तुम राजा धृतराष्ट्र की दासी हो; अतः राजमहल में प्रवेश करो। टेढ़ी पलकों वाले कृष्ण! पांडव अब तुम्हारे पति नहीं रहे। उनका तुम पर कोई अधिकार नहीं है।
 
Krishna! The Pandavas have perished and are in hell forever. Prithushroni! Now you should choose another husband. Soft-spoken one! From today you are the maid of King Dhritarashtra; hence enter the royal palace. Krishna with crooked eyelashes! The Pandavas are no longer your husbands. They do not have any right over you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)