श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  8.73.77 
अशक्नुवंश्चाभिमन्यो: कर्ण: स्थातुं रणेऽग्रत:।
सौभद्रशरनिर्भिन्नो विसंज्ञ: शोणितोक्षित:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण में युद्धभूमि में अभिमन्यु के सामने टिकने की शक्ति नहीं थी। सुभद्रापुत्र के बाणों से घायल होकर वह रक्त से लथपथ और अचेत अवस्था में था।
 
Karna did not have the strength to stand against Abhimanyu on the battlefield. He was covered in blood and unconscious after being shot by Subhadra's son's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)