vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना
»
श्लोक 67-68h
श्लोक
8.73.67-68h
कर्णमाश्रित्य कौन्तेय धार्तराष्ट्रेण विग्रह:॥ ६७॥
रोचितो भवता सार्धं जानतापि बलं तव।
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! आपके बल को जानते हुए भी दुर्योधन ने कर्ण पर भरोसा करके आपके विरुद्ध युद्ध करने का निश्चय किया है।
Kuntinandan! Even after knowing your strength, Duryodhan has chosen to wage war against you trusting in Karna. 67 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×