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mahabharat 8.73.52-53h: उसके प्रमुख योद्धा नष्ट हो गए। घोड़े, रथ और हाथी भी मारे गए। अब यह कौरव सेना सूर्य, चन्द्रमा और तारों से रहित आकाश के समान दीन-हीन प्रतीत हो रही है।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  8.73.52-53h 
शीर्णप्रवरयोधाद्य हतवाजिरथद्विपा॥ ५२॥
हीना सूर्येन्दुनक्षत्रैर्द्यौरिवाभाति भारती।
 
 
अनुवाद
उसके प्रमुख योद्धा नष्ट हो गए। घोड़े, रथ और हाथी भी मारे गए। अब यह कौरव सेना सूर्य, चन्द्रमा और तारों से रहित आकाश के समान दीन-हीन प्रतीत हो रही है।
 
‘Its chief warriors were destroyed. Horses, chariots and elephants were also killed. Now this Kaurava army appears to be as destitute as the sky devoid of the sun, moon and stars. 52 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)