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mahabharat 8.73.47-48h: पार्थ! आपके अतिरिक्त और कौन क्षत्रिय है जो युद्ध में जयद्रथ का वध करते हुए ऐसा पराक्रम दिखा सके?॥47 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  8.73.47-48h 
एवं वा को रणे कुर्यात् त्वदन्य: क्षत्रियो युधि॥ ४७॥
यादृशं ते कृतं पार्थ जयद्रथवधं प्रति।
 
 
अनुवाद
पार्थ! आपके अतिरिक्त और कौन क्षत्रिय है जो युद्ध में जयद्रथ का वध करते हुए ऐसा पराक्रम दिखा सके?॥47 1/2॥
 
Partha! Which Kshatriya other than you can display such valour in the war while killing Jayadratha?॥ 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)