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mahabharat 8.73.42-44h: तत्पश्चात् भयंकर महारथी द्रोणाचार्य ने पाँच दिन तक अभेद्य युद्धभूमि बनाकर शत्रु सेना का संहार, रथियों का नाश तथा युद्धस्थल में जयद्रथ की रक्षा करके रात्रिकालीन संग्राम में यमराज के समान प्रजा को जलाना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 42-44h
 
 
श्लोक  8.73.42-44h 
द्रोण: पञ्चदिनान्युग्रो विधम्य रिपुवाहिनीम्॥ ४२॥
कृत्वा व्यूहमभेद्यं च पातयित्वा महारथान्।
जयद्रथस्य समरे कृत्वा रक्षां महारथ:॥ ४३॥
अन्तकप्रतिमश्चोग्रो रात्रियुद्धेऽदहत् प्रजा:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भयंकर महारथी द्रोणाचार्य ने पाँच दिन तक अभेद्य युद्धभूमि बनाकर शत्रु सेना का संहार, रथियों का नाश तथा युद्धस्थल में जयद्रथ की रक्षा करके रात्रिकालीन संग्राम में यमराज के समान प्रजा को जलाना आरम्भ कर दिया।
 
After that, the fierce charioteer Dronacharya, after building an impenetrable battle field for five days, destroying the enemy army, destroying the charioteers and protecting Jayadratha in the battlefield, started burning the people like Yamraj in the night battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)