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mahabharat 8.73.4: पार्थ! कौरव पक्ष के योद्धा असंख्य हाथी-घोड़ों से संपन्न थे, किन्तु आप जैसे वीर शत्रु को पाकर वे युद्ध के मुहाने पर ही नष्ट हो गये।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.73.4 
भूत्वा वै कौरवा: पार्थ प्रभूतगजवाजिन:।
त्वां वै शत्रुं समासाद्य विनष्टा रणमूर्धनि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! कौरव पक्ष के योद्धा असंख्य हाथी-घोड़ों से संपन्न थे, किन्तु आप जैसे वीर शत्रु को पाकर वे युद्ध के मुहाने पर ही नष्ट हो गये।
 
Partha! The warriors of the Kaurava side were blessed with numerous elephants and horses, but on finding a brave enemy like you, they were destroyed at the mouth of the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)