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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  8.73.35-36 
विनिघ्नन् पृथिवीपालांश्चेदिपाञ्चालकेकयान्॥ ३५॥
अदहत् पाण्डवीं सेनां रथाश्वगजसंकुलाम्।
मज्जन्तमप्लवे मन्दमुज्जिहीर्षु: सुयोधनम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
‘मूर्ख दुर्योधन नाव के बिना संकटों के समुद्र में डूब रहा था; तब भीष्म ने उसे बचाने की इच्छा से चेदि, पांचाल और केकयन गणों का संहार किया तथा रथ, घोड़े और सारथि सहित पाण्डव सेना का विनाश कर दिया।
 
‘The foolish Duryodhana was drowning in a sea of ​​troubles without a boat; so Bhishma, wishing to save him, killed the Chedis, Panchalas and Kekayan tribes and destroyed the Pandava army, complete with chariots, horses and charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)