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mahabharat 8.73.32-33h: युद्धस्थल में भीष्मजी ने दोषों से युक्त अविद्या आदि नौ गतियों को छोड़कर केवल दसवीं गति से ही बाण चलाए। वे बाण पाण्डव पक्ष के घोड़ों, रथों और हाथियों का संहार करने लगे।'   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  8.73.32-33h 
गत्या दशम्या ते गत्वा जघ्नुर्वाजिरथद्विपान्॥ ३२॥
हित्वा नवगतीर्दुष्टा: स बाणानाहवेऽत्यजत्।
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में भीष्मजी ने दोषों से युक्त अविद्या आदि नौ गतियों को छोड़कर केवल दसवीं गति से ही बाण चलाए। वे बाण पाण्डव पक्ष के घोड़ों, रथों और हाथियों का संहार करने लगे।'
 
‘On the battlefield, Bhishmaji used to shoot arrows only with the tenth speed, leaving aside the nine speeds like Aaviddha etc. which were full of flaws. Those arrows started killing the horses, chariots and elephants of the Pandava side. 32 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)