Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.73.31-32h: केवल मुट्ठी भर बाणों से वह युद्धभूमि में एकत्रित लाखों शक्तिशाली पैदल सैनिकों और हाथियों को मार सकता था तथा हजारों रथियों को भी मार सकता था।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  8.73.31-32h 
हन्याद् रथसहस्राणि एकैकेनैव मुष्टिना॥ ३१॥
लक्षं नरद्विपान् हत्वा समेतान् समहाबलान्।
 
 
अनुवाद
केवल मुट्ठी भर बाणों से वह युद्धभूमि में एकत्रित लाखों शक्तिशाली पैदल सैनिकों और हाथियों को मार सकता था तथा हजारों रथियों को भी मार सकता था।
 
‘With just a handful of arrows he could kill millions of mighty foot soldiers and elephants gathered on the battlefield and also kill thousands of charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)