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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  8.73.120 
एष भीमो दृढक्रोधो वृत: पार्थ समन्तत:।
सृञ्जयैर्योधयन् कर्णं पीडॺते निशितै: शरै:॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! भीमसेन अत्यन्त क्रोध में भरे हुए, चारों ओर से बाणों से घिरे हुए, कर्ण के तीखे बाणों से पीड़ित होकर उससे युद्ध कर रहे हैं।
 
Partha! Bhimasena, firmly possessed of anger, is fighting with Karna, surrounded on all sides by arrows, and is being afflicted by his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)