Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.73.119: भरतनन्दन! जिन्होंने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, उनके लिए कर्ण के अस्त्र को रोकना अत्यन्त कठिन है। युद्धभूमि में उससे आहत होकर ये पांचाल सैनिक सब दिशाओं में भाग रहे हैं। | mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतनन्दन! जिन्होंने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, उनके लिए कर्ण के अस्त्र को रोकना अत्यन्त कठिन है। युद्धभूमि में उससे आहत होकर ये पांचाल सैनिक सब दिशाओं में भाग रहे हैं।
‘Bharatanandan! It is very difficult for those who have not controlled their mind and senses to stop Karna's weapon. After being hit by it in the battlefield, these Panchala soldiers are running in all directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥