श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  8.73.118 
एते चरन्ति संग्रामे कर्णचापच्युता: शरा:।
भ्रमराणामिव व्रातास्तापयन्ति स्म तावकान्॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
ये बाण युद्ध में कर्ण के धनुष से छूटकर मधुमक्खियों के झुंड के समान घूमते हैं और आपके योद्धाओं को पीड़ा पहुँचाते हैं॥118॥
 
These arrows shot from Karna's bow in the battle move like swarms of bees and torment your warriors.॥ 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)