श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  8.73.106 
न त्वेव भीता: पंचाला: कथंचित् स्यु: पराङ्मुखा:।
न हि मृत्युं महेष्वासा गणयन्ति महारणे॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
पांचाल योद्धा किसी भी प्रकार से भयभीत होकर युद्ध से विमुख नहीं हो सकते। वे महाधनुर्धर महायुद्ध में मृत्यु को कुछ भी नहीं समझते॥106॥
 
‘The Panchala warriors cannot be frightened in any way and turn away from the battle. Those great archers consider death as nothing in the great war.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)