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mahabharat 8.73.105: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन! देखो! कर्ण द्वारा घायल हुए तुम्हारे पांचाल भाइयों का विलाप युद्धभूमि में स्पष्ट सुनाई दे रहा है॥105॥   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  8.73.105 
अभ्याहतानां कर्णेन पञ्चालानामसौ रणे।
श्रूयते निनदो घोरस्त्वद्‍बन्धूनां परंतप॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन! देखो! कर्ण द्वारा घायल हुए तुम्हारे पांचाल भाइयों का विलाप युद्धभूमि में स्पष्ट सुनाई दे रहा है॥105॥
 
O Arjuna, tormentor of enemies! Look! The wailing cries of your Panchala brothers, wounded by Karna, can be clearly heard on the battlefield.॥ 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)