पञ्चालान् द्रौपदेयांश्च धृष्टद्युम्नशिखण्डिनौ।
धृष्टद्युम्नतनूजांश्च शतानीकं च नाकुलिम्॥ १०३॥
नकुलं सहदेवं च दुर्मुखं जनमेजयम्।
सुधर्माणं सात्यकिं च विद्धि कर्णवशं गतान्॥ १०४॥
अनुवाद
अर्जुन! आपको जानना चाहिए कि पंचालयोद्धा, द्रौपदी के पुत्र, धृष्टद्युम्न, शिखंडी, धृष्टद्युम्न के पुत्र, नकुल-कुमार शतानीक, नकुल-सहदेव, दुर्मुख, जन्मेजय, सुधर्मा और सात्यकि - ये सभी कर्ण के वश में हो गये हैं।
Arjun! You should know that Panchalayoddha, Draupadi's sons, Dhrishtadyumna, Shikhandi, Dhrishtadyumna's sons, Nakul-Kumar Shatanika, Nakul-Sahdev, Durmukh, Janmejaya, Sudharma and Satyaki - all of them have fallen under the control of Karna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥