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श्लोक 8.72.40  |
यस्य वीर्येण वीर्यं ते धार्तराष्ट्रोऽवमन्यते।
तमद्य पार्थ संग्रामे कर्णं वैकर्तनं जहि॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| पार्थ! जिस वैकर्तन कर्ण के बल से दुर्योधन तुम्हारे पराक्रम और पराक्रम की उपेक्षा कर रहा है, उसे आज युद्ध में मार डालो॥40॥ |
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| Partha! Kill that Vaikartana Karna, by whose strength Duryodhan disregards your might and valour, in the battle today. ॥ 40॥ |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कृष्णार्जुनसंवादे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें श्रीकृष्ण और अर्जुनका संवादविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥
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