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पार्थ! जिस वैकर्तन कर्ण के बल से दुर्योधन तुम्हारे पराक्रम और पराक्रम की उपेक्षा कर रहा है, उसे आज युद्ध में मार डालो॥40॥
Partha! Kill that Vaikartana Karna, by whose strength Duryodhan disregards your might and valour, in the battle today. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि कृष्णार्जुनसंवादे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें श्रीकृष्ण और अर्जुनका संवादविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥