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mahabharat 8.72.25-26h: फिर भी, जो कुछ तुम्हारे हित में है, उसे तुम्हें बताना मैं आवश्यक समझता हूँ। हे महाबाहो! युद्ध में तेजस्वी कर्ण की उपेक्षा मत करो।   |   mahabharat अध्याय 8.72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  8.72.25-26h 
अवश्यं तु मया वाच्यं यत् पथ्यं तव पाण्डव॥ २५॥
मावमंस्था महाबाहो कर्णमाहवशोभिनम्।
 
 
अनुवाद
फिर भी, जो कुछ तुम्हारे हित में है, उसे तुम्हें बताना मैं आवश्यक समझता हूँ। हे महाबाहो! युद्ध में तेजस्वी कर्ण की उपेक्षा मत करो।
 
Even then, I think it necessary to tell you whatever is beneficial for you. O mighty-armed one, do not ignore Karna who shines in battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)