श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  8.72.21-22 
तव ह्यस्त्राणि दिव्यानि लाघवं बलमेव च।
असम्मोहश्च युद्धेषु विज्ञानस्य च संतति:॥ २१॥
वेध: पातश्च लक्ष्येषु योगश्चैव तथार्जुन।
भवान् देवान् सगन्धर्वान् हन्यात् सह चराचरान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
आपके पास दिव्यास्त्र हैं, आप फुर्तीले हैं, बलवान हैं, युद्ध के समय आप घबराते नहीं, अस्त्र-शस्त्रों का आपको विशाल ज्ञान है और लक्ष्य को भेदकर मार गिराने की कला भी आपको आती है। अर्जुन! लक्ष्य भेदते समय आपका मन एकाग्र रहता है। आप गंधर्वों सहित समस्त देवताओं तथा समस्त सजीव-निर्जीव प्राणियों को एक साथ मार सकते हैं। ॥21-22॥
 
You have divine weapons, you are agile, you are strong, you do not panic during war, you have vast knowledge of weapons and you know the art of piercing and shooting down the target. Arjun! Your mind remains focused while piercing the target. You can kill all the gods including Gandharvas and all living and non-living creatures at once. ॥ 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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