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mahabharat 8.72.15-16h: युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय कुन्तीपुत्र अर्जुन को बहुत पसीना आने लगा और वे बड़ी चिन्ता करने लगे कि ‘यह सब कैसे होगा?’॥15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  8.72.15-16h 
प्रयातस्याथ पार्थस्य महान् स्वेदो व्यजायत॥ १५॥
चिन्ता च विपुला जज्ञे कथं चेदं भविष्यति।
 
 
अनुवाद
युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय कुन्तीपुत्र अर्जुन को बहुत पसीना आने लगा और वे बड़ी चिन्ता करने लगे कि ‘यह सब कैसे होगा?’॥15 1/2॥
 
On leaving for the war, Kunti's son Arjuna began to sweat profusely and he began to worry deeply, 'How will all this happen?'॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)