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mahabharat 8.72.1: संजय कहते हैं- राजन! इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर को प्रसन्न करके अर्जुन सूतपुत्र कर्ण को मारने के लिए तैयार हो गए। प्रसन्न होकर उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा- ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 72: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी रणयात्रा, मार्गमें शुभ शकुन तथा श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.72.1 
संजय उवाच
प्रसाद्य धर्मराजानं प्रहृष्टेनान्तरात्मना।
पार्थ: प्रोवाच गोविन्दं सूतपुत्रवधोद्यत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! इस प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर को प्रसन्न करके अर्जुन सूतपुत्र कर्ण को मारने के लिए तैयार हो गए। प्रसन्न होकर उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा- ॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! In this way, after pleasing Dharmaraja Yudhishthir, Arjun got ready to kill Karna, the son of Suta. Being happy, he said to Shri Krishna - ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)