vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 8: कर्ण पर्व
»
अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद
»
श्लोक 9
श्लोक
8.71.9
हत्वा तु समरे कर्णं त्वमद्य निशितै: शरै:।
विपुलां प्रीतिमाधत्स्व धर्मपुत्रस्य मानद॥ ९॥
अनुवाद
हे माननीय! आज रणभूमि में तीखे बाणों से कर्ण को मारकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर के हृदय को अपार हर्ष से भर दीजिए॥9॥
Honourable! Today, by killing Karna in the battlefield with sharp arrows, fill the heart of Dharma's son Yudhishthira with immense joy. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×